Probable Cm Faces For Bjp In Up – भाजपा ने सरकार बनाई तो इनके हाथ में हो सकती है उत्तर प्रदेश की कमान



Probable Cm Faces For Bjp In Up

उत्तर प्रदेश  चुनाव के नतीजों पर तमाम सर्वे सामने आ चुके हैं और लगभग सभी में भाजपा को बढ़त में दिखाया गया है. अनेक सर्वे में भाजपा को पूर्ण बहुमत की तरफ बढ़ते हुए बताया गया है. इसके साथ ही अब भाजपा में इस बात पर भी बहस शुरू हो गई है की अगर भाजपा सचमुच सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
स्पष्ट बहुमत के आधार पर देखा जाए तो तीनों प्रमुख पार्टियों की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार तय है. एसपी और बीएसपी के पास जहां मायावती और अखिलेश का चेहरा तो वहीं बीजेपी में इस मसले पर कड़ी प्रतिस्पर्धा है.

उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजों पर तमाम सर्वे सामने आ चुके हैं और लगभग सभी में भाजपा को बढ़त में दिखाया गया है. अनेक सर्वे में भाजपा को पूर्ण बहुमत की तरफ बढ़ते हुए बताया गया है. इसके साथ ही अब भाजपा में इस बात पर भी बहस शुरू हो गई है की अगर भाजपा सचमुच सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?

एक नजर इन सभी संभावित चेहरों पर….
राजनाथ सिंह

उत्तर प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर ज्यादातर लोग केंद्रीय गृहमंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के नाम पर शर्त लगाने को तैयार होंगे.
राजनाथ सिंह सूबे में बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता हैं. उन्होंने मार्च 2002 में मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने अपना कदम राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ाया.
वो पहले केंद्रीय मंत्री बने फिर दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. बतौर स्टार कैंपेनर राजनाथ सिंह विधानसभा चुनावों के दौरान 26 दिनों तक सूबे में जमे रहे. इस दौरान उन्होंने 120 जनसभाओं को संबोधित किया.
चुनाव प्रचार के दौरान राजनाथ सिंह ने 20 हजार किलोमीटर की यात्रा भी की. उनके बारे में कहा जाता है कि वो संगठन के काफी अनुशासित सिपाही हैं, जो हमेशा से पार्टी के फैसलों के साथ आगे बढ़ने के लिए जाने जाते हैं.
मनोज सिन्हा

बीजेपी की तरफ मुख्यमंत्री का चेहरा दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा भी हो सकते हैं
मुख्यमंत्री की रेस में राजनाथ सिंह के बाद जिस दूसरे केंद्रीय मंत्री का नाम आता है वो दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा हैं.
आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल करने वाले मनोज सिन्हा ने अपने काम से बतौर संगठनात्मक रणनीतिज्ञ का दर्जा हासिल किया है.
इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भरोसा भी जीता है. सभी इस बात को जानते हैं कि उन्हें यूपी की हर एक विधानसभा सीट की जानकारी है.
इतना ही नहीं वो प्रधानमंत्री की हाई प्रोफाइल सीट वाराणसी का जिम्मा भी संभाले हुए हैं. वो एक मजबूत पार्टी कार्यकर्ता हैं जो हमेशा लो-प्रोफाइल में रहना पसंद करते हैं.
बावजूद इसके पूर्वी यूपी में मनोज सिन्हा खासे चर्चित नेता हैं. सिन्हा के साथ बस एक ही कमी है वो है उनकी जाति. वो भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं और पूर्वी यूपी के कुछ जिलों तक ही भूमिहारों की संख्या सीमित है.
लेकिन यही कमी उनके लिए वरदान भी साबित हो सकती है क्योंकि अगर वो मुख्यमंत्री पद का जिम्मा संभालते हैं तो उनकी छवि जाति को लेकर पक्षपात नहीं करने वाले नेता की बनेगी.
केशव प्रसाद मौर्य

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या राज्य के ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं
मुख्यमंत्री की रेस में फुलपुर से पहली बार चुने गए सांसद और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का भी नाम शामिल है.
केशव प्रसाद मौर्य ने राजनाथ सिंह और मनोज सिन्हा के मुकाबले कम जनसभाओं को संबोधित किया है, क्योंकि वो पर्दे के पीछे रहकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाने में लगे थे.
एक बात जो उनके पक्ष में जाती है वो ये कि कल्याण सिंह के उत्कर्ष के दौरान जो गैर-यादव ओबीसी तबका बीजेपी के साथ खड़ा दिखता था. वही मतदाता इस बार पार्टी के साथ दिखा.
अगर सूबे में बीजेपी को भारी जनसमर्थन ओबीसी जातियों की वजह से मिलता है तो इस समुदाय से किसी नेता को नेतृत्व का मौका दिया जाना चाहिए.
हालांकि, केशव प्रसाद मौर्य के लिए जो सबसे कमजोर कड़ी है वो ये कि उन्हें थोड़ा भी प्रशासकीय अनुभव नहीं है. ऐसे में यूपी जैसे बड़े राज्य को संभालना काफी मुश्किल भी साबित हो सकता है.
संतोष गंगवार

केंद्रीय वित्तमंत्री संतोष गंगवार भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं
एक और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जो वित्त-राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं. वो भी मुख्यमंत्री की रेस में शामिल हैं.
हालांकि, उनके नाम की चर्चा खूब जोर-शोर से नहीं की जा रही है. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में 16 वीं लोकसभा के लिए बतौर सांसद उन्होंने चुनाव जीता और अपने सियासी विरोधी को 2.4 लाख मतों से चुनाव में शिकस्त दी.
जहां तक बात प्रशासकीय अनुभव की है तो संतोष गंगवार को इसकी कमी नहीं है. वित्त-राज्यमंत्री बनने से पहले गंगवार  पेट्रोलियम और नेचुरल गैस राज्यमंत्री थे.
जबकि इसके साथ ही उन्हें संसदीय कार्य की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी.
वर्ष 1999 में वो साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री भी रह चुके हैं. 1989 के बाद से ही गंगवार बीजेपी के स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं.