Captain Amarinder To Take Oath As Cm Siddhu May Get Urban Development – पंजाब में कैप्‍टन बनेंगे किंग, 9 मंत्रियों में सिद्धू को मिलेगा शहरी विकास मंत्रालय !



Captain Amarinder To Take Oath As Cm Siddhu May Get Urban Development

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह सुबह 10 बजे चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कैप्‍टन के किंग बनने के बाद 9 और मंत्री भी शपथ लेंगे. सूत्राेें के हवाले से खबर आ रही है कि बीजेपी से कांग्रेस आए सिद्धू को शहरी विकास मंत्रालय दिया जाएगा.
शपथ ग्रहण समारोह बहुत ही सादा रखने की तैयारी है. दरअसल कैप्टन अमरिंदर सिंह जनता के बीच ये संदेश देना चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार किसी भी तरह की फिजूलखर्ची नहीं होने देगी. इस सरकार के कार्यकाल में फिजूलखर्ची को रोका जाएगा.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह सुबह 10 बजे चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कैप्‍टन के किंग बनने के बाद 9 और मंत्री भी शपथ लेंगे. सूत्राेें के हवाले से खबर आ रही है कि बीजेपी से कांग्रेस आए सिद्धू को शहरी विकास मंत्रालय दिया जाएगा.

पारिवारिक तौर पर भी कैप्टन अमरिंदर सिंह परेशान चल रहे हैं. उनकी माता महेंद्र कौर चंडीगढ़ के पीजीआई में दाखिल हैं. ऐसा माना जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह को बिल्कुल साधारण रखने के पीछे ये भी एक वजह हो सकती है. हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह में उन 6 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शिरकत करेंगे, जहां पर कांग्रेस की सरकार है. इसके अलावा कांग्रेस आलाकमान के सीनियर नेता और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी शपथ ग्रहण में शामिल होंगे.
शपथ ग्रहण समारोह के लिए चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में एक साधारण टैंट लगाया गया है और राजभवन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि इस शपथ ग्रहण समारोह को किसी भी तरह से खर्चीला होने से रोका जाए. सारा कार्यक्रम एक साधारण तरीके से ही संपन्न किया जाए.
कैप्टन अमरिंदर के साथ शपथ ले सकते हैं ये लोग
कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ 9 मंत्रियों के शपथ लेने की जानकारी है. पंजाब सरकार में ये होंगे चेहरे –
ब्रह्म महिंद्रा: पटियाला देहाती सीट से ब्रह्म महिंद्रा लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं. पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में महिंद्रा की गिनती होती है. बेअंत सिंह की सरकार के वक्त ब्रह्म महिंद्रा उद्योग मंत्री रह चुके हैं. जबकि 2002 से लेकर 2007 के बीच कैप्टन सरकार के वक्त वह कई बोर्डों के चेयरमैन भी रह चुके हैं.

नवजोत सिंह सिद्धू: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल हुए थे. चुनाव के आखिरी 15 दिनों में कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू को बतौर स्टार प्रचारक पूरे पंजाब में इस्तेमाल किया. पार्टी में शामिल होते हुए कहा गया था कि सिद्धू बिना किसी शर्त के कांग्रेस में शामिल हुए हैं. लेकिन पंजाब के वरिष्ठ नेता होने के कारण उनका कैबिनेट मंत्री बनना तय है.
हालांकि, सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी कैबिनेट में डिप्टी सीएम का पद नहीं चाहते हैं, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू ने राहुल गांधी और कांग्रेस आलाकमान के सामने मंशा जाहिर की है कि वो कांग्रेस सरकार में डिप्टी सीएम बनना चाहते हैं. हालांकि, इसको लेकर क्या फैसला लिया जाता है, ये शपथ ग्रहण से पहले अंतिम पलों में ही साफ हो पाएगा. नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर ईस्ट सीट से विधायक बने हैं. इस सीट पर पहले उनकी पत्नी नवजोत कौर विधायक रह चुकी हैं.
मनप्रीत बादल: मनप्रीत बादल ने पंजाब विधानसभा चुनावों से लगभग 6 महीने पहले अपनी पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) का विलय कांग्रेस में कर दिया था. मनप्रीत बादल भठिंडा शहरी सीट से विजयी हुए हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में पहले ही ऐलान कर रखा है कि सरकार बनने पर मनप्रीत बादल को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी. इससे पहले बादल सरकार में भी मनप्रीत बादल वित्त मंत्री रह चुके हैं.

साधू सिंह धर्मसोत: दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले साधू सिंह धर्मसोत लगातार चार बार विधायक रह चुके हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद नजदीकी माने जाते हैं. साथ ही बड़े दलित नेता होने के नाते मंत्रिमंडल में उनका नाम भी तय माना जा रहा है.
राणा गुरजीत सिंह: कपूरथला से जीत कर आए राणा गुरजीत सिंह लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं. वो जालंधर संसदीय सीट से सांसद भी रह चुके हैं. इस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के नजदीकी कांग्रेसियों में राणा गुरजीत सिंह का नाम सबसे आगे है. राणा गुरजीत सिंह लगातार कैप्टन कैंप से ही जुड़े रहे हैं. वरिष्ठता के आधार पर भी उनको मंत्री पद मिलना तय है.
तृप्त राजेंद्र बाजवा: पंजाब में कांग्रेस का जटसिख चेहरा हैं. लगातार पांचवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. फतेहगढ़ चूड़ियां विधानसभा क्षेत्र से जीतते आ रहे हैं. तृप्त राजेंद्र बाजवा को कैप्टन अमरिंदर सिंह का नजदीकी माना जाता है.
चरणजीत सिंह चन्नी: दलित समुदाय से आते हैं और पिछली विधानसभा में पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं. चन्नी एक बार निर्दलीय विधायक के तौर पर भी जीत चुके हैं. जबकि लगातार दूसरी बार वो कांग्रेस के टिकट पर चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं. चमकौर साहिब विधानसभा से चरणजीत चन्नी लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं.

इन्हें बनाया जा सकता है राज्य मंत्री
रजिया सुल्ताना: 2002 में कैप्टन सरकार के वक्त भी रजिया सुल्ताना मुख्य संसदीय सचिव रह चुकी हैं. मुस्लिम समुदाय से पंजाब कांग्रेस की एकमात्र बड़ी नेता हैं. महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी करती हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह के नजदीकी आईपीएस अफसर मोहम्मद मुस्तफा की पत्नी हैं. कैप्टन सरकार में बतौर पंजाब पुलिस डीजीपी भी मोहम्मद मुस्तफा का नाम पंजाब पुलिस के अफसरों में सबसे आगे चल रहा है.
अरुणा चौधरी: दलित समुदाय से संबंध रखती है. महिला कोटे से उनका मंत्रिमंडल में आना तय है. अरुणा लगातार तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंची हैं. दीनानगर विधानसभा क्षेत्र से जीती हैं.

ओ. पी. सोनी: अमृतसर सेंट्रल सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे ओ. पी. सोनी हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और लगातार चौथी बार विधायक चुने गए हैं. ओ. पी. सोनी अमृतसर लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं. लेकिन उस वक्त वो नवजोत सिंह सिद्धू से चुनाव हार गए थे.

राकेश पांडे: लुधियाना ईस्ट सीट से राकेश पांडे लगातार छठी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं. हिंदू चेहरा होने के नाते भी उन्हें पंजाब सरकार कैबिनेट में मंत्री मंडल मिलने की संभावना काफी प्रबल है. इससे पहले भी कांग्रेस सरकार के समय 2002 में वो मंत्री रह चुके हैं. उनके पिता जोगेंद्र पाल पांडे भी कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

राणा के. पी. सिंह को बनाया जा सकता है स्पीकर
राणा के. पी. सिंह: कांग्रेस के हिंदू नेता राणा के. पी. सिंह भी तीसरी बार विधायक बने हैं. वरिष्ठता के आधार पर उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना था. लेकिन पहले से ही कई हिंदू चेहरे मंत्रिमंडल में लिए जाने के कारण उन्हें स्पीकर बनाया जा सकता है. इस समय राणा के.पी. सिंह पंजाब कांग्रेस में बतौर उपाध्यक्ष नियुक्त हैं.
नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में कयास लगाए जा रहे थे कि वो पंजाब की कांग्रेस सरकार में डिप्टी सीएम हो सकते हैं. लेकिन सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने मंत्रिमंडल में डिप्टी सीएम का पद नहीं चाहते हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि डिप्टी सीएम का पद तब दिया जाता है जब पार्टी के पास मेजोरिटी ना हो और गठबंधन में किसी नेता को सम्मान देने या मजबूरी के लिए डिप्टी सीएम का पद दिया जाता है, लेकिन पंजाब में कांग्रेस भारी बहुमत से जीत कर आई है. ऐसे में डिप्टी सीएम के पद की जरूरत नहीं है.
दरअसल, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं चाहते कि पंजाब सरकार में उनके समानांतर किसी को खड़ा नहीं किया जाए. इसी वजह से वो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आलाकमान को इस बात को मनवाने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं कि कांग्रेस की पंजाब सरकार में डिप्टी सीएम का पद नहीं होना चाहिए.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू को बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ दिलवाई जा सकती है और उनको कोई भारी-भरकम मंत्रालय दिया जा सकता है. वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी लगातार कांग्रेस आलाकमान और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर दबाव बनाने और डिप्टी सीएम का पद पाने की कोशिश में लगे हैं. फिलहाल नवजोत सिंह सिद्धू डिप्टी सीएम होंगे या नहीं इस पर फैसला शपथ ग्रहण से पहले अंतिम क्षणों में लिया जा सकता है, क्योंकि शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं.
जानकारी ये भी मिल रही है कि पंजाब कांग्रेस के पुराने नेता ये नहीं चाहते कि नवजोत सिंह सिद्धू जो विधानसभा चुनाव से ठीक 15 दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुए हैं, उनको पार्टी में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद दूसरे नंबर पर रखा जाए. हालांकि, खुलकर नवजोत सिंह सिद्धू का विरोध करने को कोई भी सामने नहीं आ रहा और सब कुछ सही दिखाने की कोशिश करते हुए तमाम पंजाब कांग्रेस के नेता यही कह रहे हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू में किसी तरह का कोई मतभेद या फर्क नहीं है. दोनों मिलकर पंजाब के हित में एक साथ काम करेंगे. पंजाब कांग्रेस के नेता जसवीर सिंह गिल का कहना है कि आलाकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को ओपन हैंड दे रखा है और कैप्टन अमरिंदर सिंह ही ये तय करेंगे कि उनके मंत्रिमंडल में किस नेता को कौन सा मंत्रालय और कौन सा पद दिया जाएगा.
बता दें, पिछले 10 साल से लगातार कांग्रेस पंजाब में सत्ता से दूर थी. पंजाब में एक बार फिर सरकार बनाने के लिए लंबे वक्त से कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब कांग्रेस के नेता लगे हुए थे. कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं चाहते हैं कि सरकार बनने के साथ किसी भी पार्टी नेता को कोई नाराजगी रहे. इसी वजह से सोच-समझकर मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है. ये भी कहा जा रहा है कि एक बार सरकार के गठन के बाद जल्द ही कैबिनेट का विस्तार भी किया जाएगा. लेकिन फिलहाल कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वो बड़े राजनीतिक रसूख और कद वाले नवजोत सिंह सिद्धू को अपनी कैबिनेट में कैसे और किस तरह एडजस्ट कर पाते हैं.